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बाबा श्रीचंद जी महाराज


बाबा श्रीचंद   जी गुरु नानक जी के बड़े पुत्र और उदासीन पंथ के संस्थापक थे। बाबा जी के जन्म के समय ही से शरीर पर धूनी की राख लगी थी व एक कान में मांस की मुंदरा थी। बाबा श्रीचंद जी को भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है।

भादो शुकलनवमी के दिन  बाबा श्रीचंद जी ने गुरु नानक देवजी के घर पुत्र रूप में जन्म लिया  ।
और जब गुरु नानक जी  विश्व भ्रमण करने के लिए घर से निकल पडे। तब माता सुलाक्खानी  जी बाबा श्रीचंद   और उनके छोटे भाई बाबा लक्ष्मी दास को ले कर अपने माता -पिता के घर चली गई  जो की रवि नदी के बाए किनारे पक्खो के रंधावे में था ।

बाबा श्रीचंद  जी की शुरुआत बहुत ही एकांत से हुई और जैसे ही वह बडे हुए उन्होंने सांसारिक मामलों में उदासीनता विकसित की ।

ग्यारह वर्ष  की निविदा उम्र में उन्होंने  अपना  घर परिवार छोड  दिया औरकश्मीर चले गए जहां उन्होंने पंडित पुरुषोत्तम कौल के अंतर्गत संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन किया और बाद में ऋषि अविनाश मुनी के तहत योग का अध्ययन किया और अभ्यास किया ।

फिर जब गुरु नानक जी  विश्व भ्रमण करने के बाद रवि के दाएं किनार पर करतारपुर  में बस गए यो की  पखोक से दूर नहीं  था श्रीचंद जी भी परिवार में शामिल हो गए ।



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