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गुरु का हुकम



गुरु नानक साहिब ने अपने सेवकों को मुर्दा खाने का हुकम दिया। देखने में यह मुनासिब हुकम नही था । हम मुर्दे को छु जाने पर नहाते है । फिर खायें कौन ? एक भाई लहना खड़े रहे बाकी सब शिष्य चले गए। यह सबको नाजायज हुकम लगा था । लेकिन भाई लहना को नही । गुरु नानक साहिब ने उनको गुरु -गद्दी का हक़दार बना दिया और वे भाई लहना से गुरु अंगद साहिब बन गये। इसी तरह जब गुरु गोविन्दसिंह  जी ने अपने शिष्यों की परख की तब पांच हज़ार में से सिर्फ पांच प्यारे निकले । जब गुरु परखता है तो बड़े -बड़े फेल हो जाते है।  जीव  का इम्तिहान में पास होना बड़ी मुश्किल बात है। गुरु किसी का इम्तिहान न ले 

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