Latest Updates

अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यताएं



वैशाख मास, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। अक्षय तृतीया के पीछे बहुत सारी मान्यताएं, बहुत सारी कहानियां भी जुड़ी हैं। इसे भगवान परशुराम जयंती के जन्मदिन यानि परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के अलावा विष्णु के अवतार नर व नारायण के अवतरित होने की मान्यता भी इसी दिन से जुड़ी है। यह भी मान्यता है कि त्रेता युग का आरंभ इसी तिथि से हुआ था।

मान्यता के अनुसार इस तिथि को उपवास रखने, स्नान दान करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। यानि व्रती को कभी भी किसी चीज़ का अभाव नहीं होता, उसके भंडार हमेशा भरे रहते हैं। चूंकि इस व्रत का फल कभी कम न होने वाला, न घटने वाला, कभी नष्ट न होने वाला होता है इसलिये इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।

🌟 मांगलिक कार्यों के लिये इस तिथि को बहुत ही शुभ माना जाता है। एक और जहां मांगलिक कार्यों को करने के लिये अक्षर शुभ घड़ी व शुभ मुहूर्त जानने के लिये पंडित जी से सलाह लेनी पड़ती है वहीं अक्षय तृतीया एक ऐसी सर्वसिद्धि देने वाली तिथि मानी जाती है जिसमें किसी भी मुहूर्त को दिखाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस तिथि को अबूझ मुहूर्तों में शामिल किया जाता है। इस दिन सोना खरीदने की परंपरा भी है। मान्यता है कि ऐसा करने से समृद्धि आती है। मान्यता यह भी है कि अपनी नेक कमाई में से कुछ न कुछ दान इस दिन जरुर करना चाहिये।

*7 मई, 2019 (मंगलवार)*

अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त : 05:36:07 से 12:17:55 तक

अवधि : 6 घंटे 41 मिनट।    अक्षय तृतीया व्रत व पूजन विधि

1.  इस दिन व्रत करने वाले को चाहिए की वह सुबह स्नानादि से शुद्ध होकर पीले वस्त्र धारण करें।

2.  अपने घर के मंदिर में विष्णु जी को गंगाजल से शुद्ध करके तुलसी, पीले फूलों की माला या पीले पुष्प अर्पित करें।

3.  फिर धूप-अगरबत्ती, ज्योत जलाकर पीले आसन पर बैठकर विष्णु जी से सम्बंधित पाठ (विष्णु सहस्त्रनाम, विष्णु चालीसा) पढ़ने के बाद अंत में विष्णु जी की आरती पढ़ें।

4.  साथ ही इस दिन विष्णु जी के नाम से गरीबों को खिलाना या दान देना अत्यंत पुण्य-फलदायी होता है।

*नोट* : अगर पूर्ण व्रत रखना संभव न हो तो पीला मीठा हलवा, केला, पीले मीठे चावल बनाकर खा सकते हैं।

5  अक्षय तृतीया का दिन साल के उन साढ़े तीन मुहूर्त में से एक है जो सबसे शुभ माने जाते हैं। इस दिन अधिकांश शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

6  इस दिन गंगा स्नान करने का भी बड़ा भारी माहात्म्य बताया गया है। जो मनुष्य इस दिन गंगा स्नान करता है, वह निश्चय ही सारे पापों से मुक्त हो जाता है।

7 इस दिन पितृ श्राद्ध करने का भी विधान है। जौ, गेहूँ, चने, सत्तू, दही-चावल, दूध से बने पदार्थ आदि सामग्री का दान अपने पितरों (पूर्वजों) के नाम से करके किसी ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।

8  इस दिन किसी तीर्थ स्थान पर अपने पितरों के नाम से श्राद्ध व तर्पण करना बहुत शुभ होता है।

9 कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सोना ख़रीदना इस दिन शुभ होता है।

10  इसी तिथि को परशुराम व हयग्रीव अवतार हुए थे।

11  त्रेतायुग का प्रांरभ भी इसी तिथि को हुआ था।

12  इस दिन श्री बद्रीनाथ जी के पट खुलते हैं।

 सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार गृहप्रवेश के लिए शुभ दिन माने गए हैं। इसके अलावा जहां तक संभव हो मंगलवार और रविवार को गृहप्रवेश नहीं करना चाहिए।अगर कोई व्‍यक्‍ति मंगलवार के दिन ये कार्य करता है तो उसकी कुंडली में मंगल दोष उत्‍पन्‍न हो जाता है और फिर मंगल दोष के कारण जातक के जीवन में उससे संबंधित कष्‍ट आने लगते हैं। इस तरह के दोषों से बचने के लिए बेहतर होगा कि आप जान लें कि मंगलवार के दिन कौन-से काम वर्जित हैं।
 शास्‍त्रों के अनुसार मंगलवार के दिन घर या दुकान में हवन नहीं करवाना चाहिए। साथ ही धारदार नुकीली वस्‍तुएं भी नहीं खरीदनी चाहिए।  अत निर्णय ज्योतिष गण करे की आखा तीज चाहे मगलवार को पडे घर मे हवन या ग्रह् प्रवेश से बचे।

No comments