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पीर बाबा बुडन अली शाह जी का गुरु नानक जी को दूध पिलाना

 

बाबा बुडन अली शाह गुरु नानक देवजी के घने मित्र थे । सारी उम्र दूध के बिना दूसरी कोई चीज़ प्रयोग नही की। 500 साल बाद उसी स्थान पर बफात पा गए, जिन बकरियों का दूध प्रयोग करते थे। उनकी रखवाली शेर करते थे।  बाबा बुडन अली शाह जी की ज्यारत कीरतपुर है और नन्दपुर में गुरुद्वारा है।
जब गुरुनानक जी बाबा बुडन अली शाह जी को मिलने गए तो बाबा ने कहा हमारे शेर बकरियाँ चराकर आया तो आते ही गुरूजी को नमस्कार किया और पाऊँ पकड़ लिए ।  बाबा बुडन अली शाह जी ने  शेर से  कहा कि जाओ और बकरियों का दूध निकालकर लाओ और फ़क़ीर को पिला दो ।  शेर कोरे बर्तन में दूध निकालकर लाया ।  नानक जी ने बाबा बुडन अली शाह से कहा कि मै छटी पदशाही  मै आकर यह दूध पिऊगा ।  बाबा बुडन अली शाह जी ने कहा हो सकता है मेरी उम्र इतनी ना हो क्योंकि  बाबाजी की आयु  काफी थी | आँखों के पर्दे झूल गए थे ।  गुरुनानकदेव जी ने कहा कहा आपकी उम्र काफी है ।  आप हमारी अमानत रखेँगे और मैं आपसे छटी पदशाही मैं यह लूंगा ।  बाबा जी ने गुरु जी से उस वक्त उन्हें पहचानने के लिए कोई निशानी माँगी | गुरु नानक देव ने कहा की मैं आकर अपने दाहिने हाथ का अंगूठा हिलाऊगा ।  बाद बाद में वे आपस में मिलते जुलते रहे । छटी पदशाही  का समय हुआ तो गुरु हरगोविंद सिंह जी बाबा बुडन अली शाह जी से मिलने गए और अपने दाहिने हाथ का अंगूठा हिलाया | बाबा बुडन अली शाह जी ने उनसे कहा की आप गुरु नानक देव जी का रूप धारण करें ।  गुरु हरगोविंद सिंह जी ने गुरु नानकदेव जी का रूप धारण किया । फिर बाबा बुडन  अली शाह जी ने वह दूध निकाल कर गुरु जी को दिया और गुरु नानकदेव जी ने बाबा जी को लम्बी उम्र की दुआ दी ।

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