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आपको भी नहीं पता होंगी श्री बावे वाली माता मंदिर, बहू किला से जुड़ी कुछ खास बातें


 

बाहू फोर्ट जम्मू कश्मीर का ऐतिहासिक किला है जोकि तवी नदी के किनारे स्थापित है ऐसा माना जाता है की यह किला 3000 वर्ष पहले बनाया गया था,ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ साथ इस किले का धार्मिक महत्व भी है क्यूंकी बाहू किले मे  माता महाकाली का एक मंदिर है जिसे जम्मू के लोग माँ बावे वाली माता के नाम से पुकारते और पूजते है यह किला और इस मे स्थित माता काली का मंदिर जम्मू के मुख्य पर्यटन स्थलों मे से भी एक है बाहू किले के भीतर इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1822 मे हुई बताई जाती है मंदिर के अंदर स्थित माता काली की शीला आदि कालीन है ऐसा माना जाता है की इस मंदिर को राजा बाहू लोचन द्वारा बनवाया गया था और बाद मे डोगरा शासको द्वारा इसका पुनः निर्माण किया गया था 

बावे वाली माता मंदिर मे माता की शीला स्थापना से जुड़ी दो कहानिया मुख्यतः सुनाई जाती है इनमे से एक कथा के मुताबिक करीब तीन सो साल पहले देवी महाकाली ने पंडित जगत राम शर्मा को स्वप्न मे दर्शन देकर पहाड़ी पर शीला रूप मे उपस्थित होने की बात बताई और फिर कुछ दिन बाद उसी पहाड़ी पर से देवी का प्रतीक एक पत्थर मिला जिसे पहाड़ पर एक मंदिर मे स्थापित किया गया था   

दूसरी कथा के मुताबिक राजा गुलाब सिंह ने माता काली को कोलकाता से जम्मू लाया था और यहा स्थापित किया था ताकि माँ काली का आशीर्वाद जम्मू वासियो पर सदेव बना रहे इस मंदिर की महत्ता वैष्णो देवी मंदिर के बाद दूसरे स्थान पर है जानकारो की माने तो यह बावे वाली माता का  मंदिर भारत के प्रसिद्ध काली मंदिरो मे से एक है 

बावे वाली माता मंदिर मे जम्मू वासियों की असीम आस्था है ये ही कारण है की तवी नदी पर बने पुल पर से गुजरते समय यहा पर हर किसी की आंखे और मस्तक श्र्धा से झुक जाता है ,लोगो का मानना है की माँ काली जम्मू की सदियो से रक्षा करती आ रही है और जम्मू वासियों की आराध्य है  यू तो बावे मंदिर मे श्र्धलुओ का जमाववड़ा साल भर लगा रेहता है लेकिन मंगलवार और रविवार को यहा भगतो की भरी भीड़ जुटती है जो माँ की एक झलक पाने के लिए घंटो कतरो मे लगे रहते है और तो और साल मे दो बार पावन नवरात्रो पर विशेष मेला भी लगता है 

पूर्व मे बावे मंदिर मे किसी के भी द्वारा मांगी गयी मन्नत के पूरा होते ही छिलली चढ़ाने यानि पशु बलि की परंपरा था जो की वक़्त के साथ अब बादल गयी है अब केवल छिल्ली पर पानी छिड़क कर माँ को अर्पित कर उस पशु को छोड़ दिया जाता है जिससे परंपरा भी निभाई जाती है और जीव हत्या भी नहीं होती 

बावे माता मंदिर मे आने वाले भगतो व पर्यटको के लिए विशेष सुविधाए है एक तरफ खूबसूरत सीडी नुमा बाग है मंदिर तक पहुँचने वाला सम्पूर्ण ट्रेक पक्का कर दिया गया आस पास खूबसूरत पानी के झरने आदि भी स्थापित किए गए है तो वही माता के मंदिर तक जाने के लिए ड्योढ़ी से लेकर बाहु किले तक लगभग आधा किलोमीटर का पक्का ट्रैक बना हुआ है। जिसके दोनों और छोटी-छोटी दुकानें हैं। इनमें अधिकांश दुकानें प्रसाद की हैं जहा बर्फी का विशेष प्रसाद माँ को चढ़ाने के लिए मिलता है, यह बर्फी खुले बाजार में मिलने वाली बर्फी से बिल्कुल अलग है। इसे बनाने वाले भी खास है और बेचने वाले भी। पारंपरिक विधि अपनाते हुए आज भी इस बर्फी को वैसे ही तैयार किया जाता है तो जब भी आप जम्मू कश्मीर आए तो माँ बावे वाले के दर्शन ज़रूर करे

श्री बावे वाली माता की आरती


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