रात का सन्नाटा था। दूर कहीं अज़ान की हल्की आवाज़ गूंज रही थी।
मुरीद उस्ताद के पास बैठा था, लेकिन उसके दिल में एक गहरा सवाल था।
कुछ देर बाद उसने धीरे से पूछा,
“उस्ताद… Asli Jihad kya hai? क्या ये सिर्फ बाहर की लड़ाई है?”
उस्ताद ने उसकी तरफ देखा और नरमी से बोले,
“बेटा, Asli Jihad kya hai — ये समझना ही असली समझ है।
सबसे बड़ी जंग बाहर नहीं, तेरे अंदर है — इसे जिहाद बिन नफ़्स कहते हैं।”
“नफ़्स तुझे हर बार गुस्से, लालच और गलत रास्ते की तरफ खींचता है…
और रूह तुझे सब्र, सच्चाई और अल्लाह की तरफ बुलाती है।”
उन्होंने मिसाल दी,
“जैसे कोई इंसान अपने ही साए से भाग रहा हो — वो थक जाएगा, लेकिन साया नहीं छूटेगा…
वैसे ही नफ़्स से भागना नहीं, उसे समझकर काबू करना पड़ता है।”
मुरीद गहराई से सुन रहा था।
उस्ताद बोले,
“हमारे नबी ﷺ ने सिखाया कि असली ताकत अपने गुस्से पर काबू पाना है।
कुरआन हमें तक़वा और सब्र की राह दिखाता है — यही जिहाद बिन नफ़्स है।”
“हर बार जब तू गलत चाहत को रोकता है, सच को चुनता है —
तू इस जंग में जीत रहा होता है।”
✨ “सबसे बड़ा मुजाहिद वो है, जो अपने अंदर के तूफ़ान को सुकून में बदल दे।”
उस्ताद ने आख़िर में कहा,
“ये जंग हर दिन होगी… लेकिन असली जीत उसी की है, जो खुद पर जीत जाए।”
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