सुबह का वक्त था। हल्की रोशनी कमरे में फैल रही थी, और एक अजीब सा सुकून माहौल में था।
मुरीद उस्ताद के सामने बैठा था, लेकिन उसके चेहरे पर एक गहरी सोच झलक रही थी।
कुछ देर बाद उसने पूछा,
“उस्ताद… Surah Ikhlas Tauheed ka paigham इतना खास क्यों है?”
उस्ताद ने मुस्कुराकर कहा,
“बेटा, ये छोटी सी सूरत है, लेकिन इसमें तौहीद का पूरा सच समाया हुआ है।”
“ये हमें बताती है कि अल्लाह एक है, न उसका कोई हिस्सा है, न कोई उसके जैसा…
वो सब से अलग, सबसे ऊपर और हर चीज़ से बेनियाज़ है।”
उन्होंने समझाया,
“जैसे सूरज अकेला है, लेकिन पूरी दुनिया को रोशनी देता है…
वैसे ही अल्लाह अकेला है, लेकिन हर चीज़ उसी पर निर्भर है।”
मुरीद ध्यान से सुन रहा था।
उस्ताद बोले,
“हमारे नबी ﷺ ने इस सूरत को बहुत अहमियत दी…
क्योंकि ये दिल को शिर्क से साफ करती है और ईमान को मजबूत बनाती है।”
“जब तू इसे समझकर पढ़ता है, तो तेरा दिल सिर्फ अल्लाह पर टिक जाता है…
और बाकी सब चीजें छोटी लगने लगती हैं।”
✨ “जिस दिल में तौहीद बस जाए, वहां डर और उलझन की जगह नहीं रहती।”
उस्ताद ने आख़िर में कहा,
“इस सूरत को सिर्फ पढ़ नहीं… महसूस कर — तेरी पूरी सोच बदल जाएगी।”
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