आज उसका दिल भारी था… बिना किसी वजह के।
सब कुछ ठीक होते हुए भी अंदर खालीपन था।
वो चुपचाप एक बुज़ुर्ग के पास बैठा और बोला,
“हज़रत… Allah ka zikr karne se sukoon kyun milta hai? जब भी नाम लेता हूँ, दिल हल्का हो जाता है।”
बुज़ुर्ग ने मुस्कुराकर कहा,
“क्योंकि बेटा, दिल की असली ज़िंदगी उसी से है…
जिसने उसे बनाया है।”
“जब तू अल्लाह का ज़िक्र करता है, तो तू अपनी जड़ से जुड़ता है…
और जड़ से जुड़ते ही पेड़ मजबूत हो जाता है।”
उन्होंने समझाया,
“जैसे सूखी ज़मीन को पानी मिलते ही वो हरी हो जाती है…
वैसे ही दिल ज़िक्र से ज़िंदा हो जाता है।”
तालिब के चेहरे पर सुकून उतरने लगा।
बुज़ुर्ग बोले,
“कुरआन हमें याद दिलाता है कि दिलों का सुकून अल्लाह की याद में है…
और हमारे नबी ﷺ ने हर हाल में ज़िक्र करने की तालीम दी।”
“जब तू दुनिया में सुकून ढूंढता है, वो थोड़ी देर का होता है…
लेकिन जब तू अल्लाह को याद करता है, वो दिल में उतर जाता है।”
✨ “ज़िक्र सिर्फ लफ्ज़ नहीं… वो दिल और रूह का जुड़ाव है।”
बुज़ुर्ग ने आख़िर में कहा,
“ज़ुबान से शुरू कर…
एक दिन दिल खुद ज़िक्र करने लगेगा।”
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