आज उसके दिमाग में शोर था…
एक ही बात बार-बार घूम रही थी, जैसे कोई रास्ता ही नहीं मिल रहा।
Overthinking ka ilaj kya hai — ये सवाल उसके अंदर गूंज रहा था, लेकिन जवाब नहीं मिल रहा था।
वो अपने मुर्शिद के पास गया और बोला,
“हज़रत… मैं सोचता बहुत हूँ… लेकिन सुकून कहीं नहीं मिलता।”
मुर्शिद ने नरमी से कहा,
“क्योंकि बेटा, तू सोचता ज़्यादा है… और भरोसा कम करता है।”
“दिमाग सवाल बनाता है…
लेकिन दिल जवाब जानता है।”
“जब तू हर चीज़ को अपने कंट्रोल में रखना चाहता है,
तो दिमाग थक जाता है… और बेचैनी बढ़ जाती है।”
तालिब चुप हो गया।
मुर्शिद ने समझाया,
“जैसे पानी को जितना हिलाओगे, वो उतना गंदा दिखेगा…
लेकिन उसे छोड़ दो, तो खुद साफ हो जाता है।”
“पहला तरीका — रुकना सीख
हर सोच के पीछे भाग मत”
“दूसरा — ज़िक्र कर
दिल को अल्लाह से जोड़, दिमाग खुद शांत हो जाएगा”
“तीसरा — भरोसा रख
हर चीज़ तेरे बस में नहीं, कुछ अल्लाह पर छोड़ दे”
✨ “ज़्यादा सोचने से हल नहीं मिलता… सुकून छोड़ने से मिलता है।”
मुर्शिद ने आख़िर में कहा,
“दिमाग को मत पकड़…
दिल को पकड़ — वही तुझे सुकून देगा।”
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