आज वो खामोश था… लेकिन उसके अंदर सवालों का शोर था।
दुनिया ने उसे प्यार के कई मतलब सिखाए थे, लेकिन दिल अब भी उलझा हुआ था।
वो अपने पीर के पास बैठा और धीरे से बोला,
“हज़रत… Pyar kya hota hai ? क्या ये सिर्फ किसी इंसान से जुड़ा होता है?”
पीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“बेटा, जो सिर्फ इंसान से हो — वो मोहब्बत है…
और जो रूह से हो — वही असली इश्क है।”
उन्होंने समझाया,
“दुनिया का प्यार शर्तों पर चलता है…
और रूह का प्यार बिना शर्त होता है।”
“जैसे फूल खुशबू देता है बिना किसी उम्मीद के…
वैसे ही सच्चा प्यार देता है, मांगता नहीं।”
तालिब की आंखों में सुकून उतरने लगा।
पीर बोले,
“हमारे नबी ﷺ ने सिखाया कि सबसे बेहतरीन प्यार वो है जो अल्लाह के लिए हो।
जब तू किसी से अल्लाह के लिए प्यार करता है, तो उसमें नफ़्स नहीं होता — सिर्फ सच्चाई होती है।”
“जब प्यार में सिर्फ खुद की चाह हो, तो वो बोझ बन जाता है…
और जब उसमें अल्लाह हो, तो वो सुकून बन जाता है।”
✨ “सच्चा प्यार वो नहीं जो तुझे पकड़ ले… बल्कि वो है जो तुझे अल्लाह के करीब ले जाए।”
पीर ने आख़िर में कहा,
“प्यार को समझना है तो दिल से आगे बढ़…
रूह तक पहुंच — वहीं असली इश्क है।”
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