आज उसके दिल में शिकायत थी…
इबादत करता था, फिर भी सुकून नहीं मिल रहा था।
वो चुपचाप एक बुज़ुर्ग के पास बैठा,
और धीरे से बोला,
“हज़रत… Ibadat karne walon ko takleef kyun milti hai? जब हम अल्लाह के करीब जाते हैं, तो मुश्किलें क्यों बढ़ जाती हैं?”
बुज़ुर्ग ने गहरी नज़र से देखा,
“क्योंकि बेटा, अल्लाह अपने करीब वालों को खाली नहीं छोड़ता…
उन्हें तराशता है।”
“सोने को जब तक आग में नहीं डाला जाता, वो चमकता नहीं…
और इंसान को जब तक आज़माया नहीं जाता, वो मजबूत नहीं होता।”
शागिर्द खामोश हो गया।
बुज़ुर्ग बोले,
“हमारे नबी ﷺ ने सबसे ज्यादा तकलीफें झेली…
और वही अल्लाह के सबसे करीब थे।”
“तकलीफ सज़ा नहीं होती…
कई बार वो सफाई होती है, जो इंसान को ऊँचा उठाती है।”
उन्होंने समझाया,
“जैसे कड़वी दवा शरीर को ठीक करती है…
वैसे ही सब्र इंसान की रूह को मजबूत करता है।”
✨ “जिसे अल्लाह चाहता है, उसे आसान रास्ता नहीं… सही रास्ता देता है।”
बुज़ुर्ग ने आख़िर में कहा,
“जब तकलीफ आए, शिकायत मत कर…
समझ कि तुझे चुना गया है — मजबूत बनने के लिए।”
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