मुरीद ने पूछा, “उस्ताद, Bismillah ka asar सच में हर काम में होता है क्या?”
उस्ताद ने नर्मी से जवाब दिया, “बेटा, Bismillah ka asar उस चाबी की तरह है जो हर काम में बरकत के दरवाज़े खोल देती है।”
उन्होंने समझाया, “जब तू ‘बिस्मिल्लाह’ कहकर कोई काम शुरू करता है, तो तू अपने अहंकार को छोड़कर अल्लाह की मदद मांगता है। यही शुरुआत काम को हल्का और आसान बना देती है।”
“देख, अगर कोई काम बिना बिस्मिल्लाह के शुरू होता है, तो उसमें जल्दबाज़ी और कमी रह जाती है। लेकिन बिस्मिल्लाह के साथ वही काम सुकून और बरकत लेकर आता है।”
मुरीद ने कहा, “उस्ताद, क्या ये सिर्फ एक आदत है?”
उस्ताद बोले, “नहीं, ये आदत नहीं — ये इबादत है। हमारे नबी ﷺ हर काम से पहले बिस्मिल्लाह कहते थे, ताकि हर अमल अल्लाह के नाम से जुड़ जाए।”
“कुरआन की शुरुआत भी ‘बिस्मिल्लाह’ से होती है — ये हमें सिखाता है कि हर सफर अल्लाह के नाम से शुरू होना चाहिए।”
✨ “जिस काम की शुरुआत बिस्मिल्लाह से हो, उसका अंत रहमत में होता है।”
उस्ताद ने मुस्कुराकर कहा, “आज से हर छोटा-बड़ा काम बिस्मिल्लाह से शुरू कर — तू खुद बरकत को महसूस करेगा।”
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