रात शांत थी… लेकिन उसके अंदर तूफ़ान था।
आसमान की तरफ देखता हुआ वो एक ही सवाल में उलझा हुआ था।
कुछ देर बाद वो एक बुज़ुर्ग के पास गया और बोला,
“हज़रत… Maut se dar kyun lagta hai? दिल घबरा जाता है जब इसका ख्याल आता है।”
बुज़ुर्ग ने गहरी नज़र से देखा और कहा,
“क्योंकि बेटा, इंसान उस चीज़ से डरता है जिसे वो समझता नहीं…
और जिससे उसका दिल जुड़ा नहीं होता।”
उन्होंने समझाया,
“जब दिल दुनिया से बंध जाता है, तो उसे छोड़ने का डर लगता है…
और जब दिल अल्लाह से जुड़ जाता है, तो वही मुलाकात लगती है।”
“ये वैसा ही है जैसे अंधेरे कमरे में कोई अनजान चीज़ हो…
डर तब तक रहता है, जब तक रोशनी न आ जाए।”
नौजवान खामोश हो गया।
बुज़ुर्ग बोले,
“हमारे नबी ﷺ ने हमें आख़िरत को याद रखने की तालीम दी…
ताकि दिल तैयार रहे, डरे नहीं।”
“मौत अंत नहीं है… एक सफर की शुरुआत है।
जो इसे समझ लेता है, उसका डर सुकून में बदल जाता है।”
✨ “मौत से डरना नहीं… उसके लिए तैयार होना असली समझ है।”
बुज़ुर्ग ने आख़िर में कहा,
“अपने दिल को अल्लाह से जोड़…
फिर मौत डर नहीं, मुलाकात लगेगी।”
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